- Advertisement -

2014 में मरे 250 लोग फिर होंगे ज़िंदा, दिन-रात मेहनत कर रहे हैं वैज्ञानिक

201

आज से कई वर्ष पहले वैज्ञानिको ने चांद पर जाने का दावा किया था तो उस समय लोगों ने उसका मजाक उडाया था और कहा ये कभी मुमकिन नहीं हो सकता। लेकिन नामुमकिन को मुमकिन कर देने वाले वैज्ञानिकों ने ऐसा कर दिखाया और 20 जुलाई 1969 को नील ऑर्मस्ट्रांग नाम के एस्ट्रोनॉट ने अपने साथियो के साथ ये कारनामा करके उन सभी लोगों का मुंह बंद कर दिया जो एक समय पर विज्ञान के खिलाफ़ उसका मजाक उड़ा रहे थे।

Source

इसी तरह साल 1960 में कई वैज्ञानिकों ने दावा किया था कि वह मरे हुए इंसानों को फिर से जिंदा करने के लिए काम करना शुरु कर चुके हैं। एक बार फिर वैज्ञानिकों की इसी कोशिश को दुनिया भर में मजाक उड़ाया गया। क्योंकि किसी भी इंसान के लिए इस बात पर भरोसा करना मुश्किल होगा कि कोई मरने के बाद भी जिंदा कैसे हो सकता है। जिन वैज्ञानिकों की कोशिश को हमने पहले भी बेवकूफी बताया था, आज हम उन्हीं की देन और तकनीक पर मौज काट रहे हैं।

Source

अपनी इस कोशिश को पूरा करने के लिए दुनिया भर के वैज्ञानिक अमेरिका में जुटे हुए हैं और इस नामुमकिन काम को मुमकिन बनाने में लगे हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि एक खास थ्योरी के ज़रिए मरे हुए इंसानो को जिंदा किया जा सकता है। लेकिन शर्म की बात तो ये है की लोग इन वैज्ञानिकों की मेहनत को सलाम करने की बजाए उनका मजाक बना रहे हैं।

इस प्रक्रिया का नाम रखा गया था क्रायोप्रिजर्वेशन

इस प्रक्रिया में इंसान की मृत शरीर को एक ट्यूब की तरह दिखने वाले फ्रिज में संरक्षित रूप से रखा जाता है और उस बॉडी को एल्युमिनियम की शीट से पूरी तरह से कवर कर दिया जाता है। इस फ्रिज का तापमान -250 डिग्री होता है।

Source

साल 2014 में 250 अमेरिकियों की इच्छामृत्यु के बाद सभी की मृत शरीर को वैज्ञानिकों ने इसी तरह की फ्रिज में रखा है. वैज्ञानिकों के साथ-साथ सभी इच्छामृत्यु करने वाले लोगो की मरने से पहले उम्मीद थी कि उन्हे एक बार फिर भविष्य में जिंदा किया जाएगा.

- Advertisement -

You might also like

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.