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अगर ये ना होते तो कश्मीर आज पाकिस्तान के कब्जे में होता

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भारत और पाक के बंटवारे से ही कश्मीर एक विवादित क्षेत्र रहा है , आज कश्मीर जिस मुहाने पर खड़ा है इतिहास में इसके लिए कई लोग दोषी माना जाता है , कश्मीर की कहानी बड़ी ही सरल लेकिन जटिलताओं से भरी हुई है , आज अगर कश्मीर भारत का अभिन्य अंग है तो इसका श्रेय उस शख्श को जाता है जिसने अपनी जान कुर्बान कर कश्मीर को पाकिस्तान के कब्जे होने से बचाया आज हम आपको ऐसे शख्स के बारे में बताने जा रहे है , जिसके बारे में आज से पहले अपने कभी सुना नहीं होगा

Indian army
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धरती का स्वर्ग कहा जाना वाला पूरा कश्मीर आज पाकिस्तान के कब्जे में होता अगर कश्मीर रियासत के सेनाध्यक्ष राजेंद्र सिंह नहीं होते | बात है 22 अक्टूबर 1947 की हथियारों से लेश क़बालियों पाकिस्तान की तरफ से श्रीनगर को रावण हो गए दूसरी और कश्मीर रियासत के अंदर भी बगावत चल रही थी | क़बालियों जल्द ही मुजफराबाद पहुंच गयी थी जो की श्री नगर से मात्र १६४ कम. दूर है | इधर महाराजा हरि सिंह क़बालियों से कश्मीर को बचाने के लिए भारत से मदद की गुहार लगायी | लेकिन भारत सरकार का कहना था की जब तक कश्मीर के राजा इंट्स्ट्रूमेंट ऑफ़ अक्सेशन पर हस्ताक्षर नहीं कर देते तब तक वह कोई कदम नहीं उठाएंगे | उधर पाकिस्तानी कबालियों कश्मीर पर कब्जे के लिए आगे बढ़ रहे थे |
लेकिन देश के पहले महावीर चक्र विजेता और कश्मीर के रक्षक कहलाने वाले ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह जामवाल ने जब देखा की पाकिस्तानी ज्यादा दूर नहीं है तब बिना अनुमति के भी जान पर खेल कर बारमूला से श्री नगर जोड़ने वाले पूल की धमाके से उड़ा दिया जिसकी वजह से दो दिन तक हमलावर आगे नहीं बढ़ पाए जिसका परिणाम यह हुआ की कश्मीर आज भी भारत का अभिन्य अंग है।
जब तक भारतीय सेना कश्मीर में अपनी सेना भेजती तब तक दुश्मनो को रोकने में राजेंद्र सिंह कामयाब रहे लेकिन हमलावरों से जंग में राजेंद्र सिंह शहीद हो गए |

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हालाँकि राजेंद्र सिंह कश्मीर को बचाने में सफल रहे , उनकी मौत के बाद भारतीय सेना ने पाकिस्तानी कबालियों को खदेड़ दिया | उनके इस फैसले और सहादत के कारण कश्मीर पाकिस्तान का हिस्सा बनने से बचा | ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह को शहीद होने से बाद देश के पहले महावीर चक्र से सम्मानित किया गया |

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