जानिए! क्यों पहनती हैं विवाहित महिलाएं पैरों में बिछिया

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शादीशुदा महिला के लिए सोलह श्रृंगार करना एक रिवाज है इन सोलह श्रृंगार में पैर की उंगली की बिछिया पहनने का भी रिवाज आता है। सामाजिक मान्‍यताओं के अनुसार शादी के बाद प्रत्येक महिला को बिछिया पहननी चाहिए। इसे पहनना शुभ माना जाता है। आमतौर पर बिछिया चांदी की होती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इसके पीछे का कारण क्या है ?

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हिंदू और मुस्लमान दोनों धर्म की महिलाएं शादी के बाद पैरों में बिछिया पहनती हैं, इसे शादी का प्रतीक चिन्ह माना जाता है। बिछिया पहनने का धार्मिक महत्व तो है ही इसके साथ ही इसका वैज्ञानिक महत्व भी है। विज्ञान के अनुसार पैरों के अंगूठे की तरफ से दूसरी अंगुली में ही पहनी जाती है जो गर्भाशय से जुड़ी होती है। यह गर्भाशय को नियंत्रित करती है और इसे स्वस्थ रखती है। बिछिया के दबाव से रक्तचाप नियमित और नियंत्रित रहता है, सही तरीके से रक्त संचार होने के कारण महिलाओं को तनाव से मुक्ति मिलती है।

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वेदों के अनुसार बिछिया मासिक-चक्र को नियमित करने में भी अपनी अहम भूमिका निभाता है। दोनों पैरों में चांदी की बिछिया पहनने से महिलाओं को धरती से प्राप्त होने वाली ध्रुवीय ऊर्जा को यह अपने अंदर खींचकर पूरे शरीर तक पहुंचाती है, जिससे महिलाएं तरोताज़ा महसूस करती हैं। चांदी विद्युत की अच्छी संवाहक मानी जाती है।

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