रहस्य :- माँ गंगा को पतितपावनी के नाम से क्यों जानते हैं ?

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माँ गंगा को हम पतितपावनी के नाम से जानते हैं कहा जाता है की गंगा नदी में स्नान करने से सभी पापों का नाश हो जाता है. शास्त्रों के अनुसार पतितपावनी गंगा को देव नदी कहा जाता है गंगा स्वर्ग से धरती पर आई है। माना जाता है कि गंगा श्री हरि विष्णु के चरणों से निकली है और भगवान शिव की जटाओं में आकर बसी है।

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लेकिन माँ गंगे को पतितपावनी इस वजह से कहा जाता है

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सागर नामक एक राजा को जादुई रूप से साठ हज़ार पुत्रों की प्राप्ति हो गयी। एक दिन राजा सागर ने अपने साम्राज्य की समृद्धि के लिए एक अनुष्ठान करवाया। एक अश्व उस अनुष्ठान का एक हिस्सा था जिसे इंद्र ने ईर्ष्यावश चुरा लिया। सागर ने उस अश्व की खोज के लिए अपने सभी पुत्रों को पृथ्वी के चारों तरफ भेज दिया। उन्हें वह पाताललोक में ध्यानमग्न कपिल ऋषि के निकट मिला। उसने यह मानते हुए की अश्व को कपिल ऋषि ने ही चुराया है, वे उनका अपमान करने लगे और उनकी तपस्या को भंग कर दिया। ऋषि ने कई वर्षों में पहली बार अपने नेत्रों को खोला और सागर के बेटों को देखा। इस दृष्टिपात से वे सभी के सभी जलकर भस्म हो गए।

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अंतिम संस्कार न किये जाने के कारण सागर के पुत्रों की आत्माएं विचरन करने लगीं। जब दिलीप के पुत्र और सागर के एक वंशज भगीरथ ने इस दुर्भाग्य के बारे में सुना तो उन्होंने प्रतिज्ञा की कि वे गंगा को पृथ्वी पर लायेंगे ताकि उसके जल से सागर के पुत्रों के पाप धुल सकें और उन्हें मोक्ष प्राप्त हो सके। तो उन्होंने ब्रह्मा का ध्यान करने लगे और उसने गंगा को धरती पर आने का वर माँगा। ब्रह्मा जी मान गए लेकिन एक समस्या था की पानी अगर सीधे निचे आया तो पृथ्वी नष्ट हो सकती है तो फिर शिव भगवान ने उसे अपने जटाओं में लेकर तब पृथ्वी पर भेजा। तभी से माँ गंगा को पतितपावनी के नाम से जाना जाने लगा।

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