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प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी 93 वे जन्मदिवस पर उन्होंने बधाई दे और जाने उनके कुछ रोचक बाते

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अटल बिहारी वाजपेयी भारत के ग्यारहवें और सबसे भव्य प्रधानमंत्री है , जिन्होंने देश को एक नयी ऊंचाई पर ले जानने का सपना देखा। इन्होने 16 मई से 01 जून 1996 तथा फिर 19 मार्च 1998 से 22 मई 2004 तक भारत के प्रधानमंत्री के रूप में देश की सेवा की। ये प्रधानमंत्री के साथ- साथ एक अच्छे हिन्दी कवि, पत्रकार व प्रखर वक्ता भी हैं। वे भारतीय जनसंघ की स्थापना करने वाले महापुरुषों में से एक हैं और 1968 से 1973 तक उसके अध्यक्ष भी रहे। उन्होंने लम्बे समय तक राष्ट्रधर्म, पांचजन्य और वीर अर्जुन आदि राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत अनेक पत्र-पत्रिकाओं का सम्पादन भी किया और जीवन भर भारतीय राजनीति में सक्रिय रहे। उन्होंने अपना जीवन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में आजीवन अविवाहित रहने का संकल्प लेकर प्रारम्भ किया था और देश के सर्वोच्च पद पर पहुँचने तक उस संकल्प को पूरी निष्ठा से निभाया।

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उनका जन्म 25 दिसम्बर 1924 को मध्य प्रदेश की ग्वालियर में शिन्दे की छावनी में हुआ था। उनके पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी उत्तर प्रदेश में आगरा जनपद के प्राचीन स्थान बटेश्वर के मूल निवासी थे तथा ग्वालियर रियासत में अध्यापक थे। इन्होने अपनी पढाई ग्वालियर से ही शुरू की उसके बाद उन्होंने अपने पिताजी के साथ-साथ कानपुर में ही एल०एल०बी० की पढ़ाई भी प्रारम्भ की लेकिन उसे बीच में ही विराम देकर पूरी निष्ठा से संघ के कार्य में जुट गये। विकास के लिये किये गये योगदान तथा असाधारण कार्यों के लिये 2014 दिसंबर में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
वे 1968 से 1973 तक भारतीय जनसंघ में राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुके हैं। सन् 1957 से 1977 तक जनता पार्टी की स्थापना तक वे बीस वर्ष तक लगातार जनसंघ के संसदीय दल के नेता रहे। मोरारजी देसाई की सरकार में सन् 1977 से 1979 तक विदेश मन्त्री रहे और विदेशों में भारत की छवि बनायी।

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1980 में जनता पार्टी से असन्तुष्ट होकर इन्होंने जनता पार्टी छोड़ दी और भारतीय जनता पार्टी की स्थापना में मदद की। 6 अप्रैल 1980 में बनी भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष पद का दायित्व भी वाजपेयी को सौंपा गया। लोकतन्त्र के सजग प्रहरी अटल बिहारी वाजपेयी ने सन् 1997 में प्रधानमन्त्री के रूप में देश की बागडोर संभाली। 19 अप्रैल 1998 को पुनः प्रधानमन्त्री पद की शपथ ली। प्रधान मंत्री के रूप में इन्होने देश को परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट बनाने में बहुत योगदान दी और इन्होने कारगिल के युद्ध में पाकिस्तान को करारा जबाव दिया।

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इन्होने कवि के रूप में बहुत से किताबे भी लिखी जिसमे “मृत्यु या हत्या , अमर बलिदान ,कैदी कविराय की कुण्डलियाँ,संसद में तीन दशक,अमर आग है ,कुछ लेख: कुछ भाषण ,सेक्युलर वाद” आदि प्रमुख है।

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